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इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग

 

यह विभाग न केवल वेधशालाओं में उपकरणों को प्रस्थापित करने और उसकी देखरेख की जिम्मेदारी निभाता है, बल्कि संस्थान के अनुसंधानकर्ताओं के लिए भी उपकरण एवं सॉफ्टवेयर के विकास का कार्य भी करता है I

प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर का विकास इसकी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही है I ये इकाइयॉं हमारी सारी वेधशालाओं में बरसों से कार्यरत हैं I 0.1nT के स्तर के परिवर्तन मापक सूक्ष्मग्राही प्रोटॉन मॅग्नेटोमीटर का निर्माण भी हो चुका है एवं ये इकाइयाँ उपयोग में लाई जा रही है
वेक्टर प्रोटॉन मॅग्नेटोमीटर में एक सुनियोजित त्रिज्या वाले धारा वलयों एवं सुनिश्चित धारा स्त्रोत की जरुरत होती है जिनका प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर के पहले मॉडल के विकास के बाद तुरन्त ही किया गया I वेक्टर प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर के सफल परीक्षण के बाद ऐसी कई इकाइयाँ निर्मित की गई एवं सभी वेधशालाओं में स्थापित की गईं I

चार धारा वलय वाली बार्कर कॉइल के साथ निर्मित, वेक्टर प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर की एक नई प्रणाली को अलीबाग में प्रस्थापित किया गया है

फ्लक्सगेट मेग्नेटोमीटर का विकास जारी है और अब एक फ्लक्सगेट इकाई परीक्षण हेतु बन चुकी है I फ्लक्सगेट मेग्नेटोमीटर, डिजिटल फ्लक्सगेट एवं डिक्लिनेशन – इंनक्लिनेशन (नत) मेग्नेटोमीटर आदि का विकास कार्य अब हाथ में लिया गया है I 12 वॉल्ट की बॅटरी पर चलनेवाला, कम ऊर्जा व्यय करनेवाला प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर बन चुका है जिसका सर्वेक्षणों में उपयोग किया जा रहा है I dI-dD मेग्नेटोमीटरों में प्रेक्षण की अवधि का अंतराल जितना कम हो उतना ही अच्छा है I प्रोटॉन मेग्नेटोमीटर में एक प्रेक्षण के करीब 5 सेकण्ड लगते हैं I “डायनामिक पोलाराइझेशन” तकनीक सें शायद इस अन्तराल को 3 सेकण्ड तक ला सकते हैं I इन तकनीकों का इस्तेमाल करने का विचार है I एक और तकनीक है ओवरहाउसर मेग्नेटोमीटर का उपयोग और उसका विकास भी कुछ अरसे में कर लिया जाएगा I



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