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भारत में ध्रुवीय विज्ञान:

 

भारत के लिए सन् 1982 उल्लेखनीय था, जब उसके 21 सदस्यों का एक दल, भूविज्ञान, भूभौतिकी, मौसम, भूचुम्बकत्व, समुद्रविज्ञान तथा जीवशास्त्र पर अध्ययन करने के लिए इस महाद्वीप पर उतरा I यह दल वहां केवल 10 दिन के लिए था, परंतु ध्रुवीय विज्ञान में भारत की यह शुरुवात थी I दो वर्षों के बाद दक्षिण गंगोत्री नामक आइस शेल्फ पर स्थायी स्थानक की स्थापना की गयी I तत्पश्चात इस महाद्वीप के आंतरिक भागों में कदम बढ़ाये गये और मैत्री नामक स्थानक स्थापित किया गया I यह दक्षिण गंगोत्री स्थानक से 90 कि.मी. दूर शिरमार्चर ओएसिस के पास पथरीली जगह पर स्थित है I यह स्थान बर्फरहित है एवं मीठे पानी वाले झील से युक्त है, जो गर्मी के मौसम में पिघलने वाली बर्फ के पानी से भर जाती हैं I 1982 से आज तक 25 अभियान किये जा चुके हैं I जिसका उद्देश्य विज्ञान की दृष्टि से उस महाद्वीप को परखना एवं जनसामान्य के हित के लिए नयी जानकारी हासिल करना है I विशेष रुप से देखा गया है कि अंटार्कटिका के हवामान पर आधारित प्रक्रियाएँ समस्त विश्व के हवामान पर प्रभाव डालती है I भारत के हवामान पर इसका खास प्रभाव होता है I अध्ययनों से पता चलता है कि भारतीय मानसून पर इसकी भूमिका महत्वपूर्ण है I दक्षिण गंगोत्री स्थानक सन् 1989 तक वर्षभर संचालित किया जाता रहा I बर्फ के अंदर दबने के कारण, सुरक्षा की दृष्टि से उस स्थानक का पूरी तरह से त्याग किया गया I मैत्री स्थानक आज भी कार्यरत है और हमारे वैज्ञानिक वहाँ पर वर्ष के बारहों महीने रहते हैं I

 

उच्च पवन वेगवाला, सबसे ठण्डा एवं तूफानों से भरा, अंटार्कटिका महाद्वीप का क्षेत्रफल करीब 140 लाख वर्ग कि.मी. है I नवंबर 1820 में ही यह दृष्टिगोचर हो चुका था, परंतु चारों ओर बर्फ से घिरे होने के कारण कोई वहां पहुंच नहीं पाया I रोनाल्ड एमंडसन पहले व्यक्ति थे, जो वहां तक पहुंचे और उसके आंतरिक क्षेत्र में गमन कर 14 दिसंबर 1911 को दक्षिणी भौगोलिक ध्रुव पर पहुँचे I यह भूखण्ड काफी दुर्गम है और यहाँ का मौसम बहुत ही प्रतिकूल होता है I भूचुम्बकीय ध्रुव पर -89.6C का विश्व का न्यूनतम तापमान दर्ज हुआ है I भूखण्ड का 98% भाग हिमाच्छादित है, जिसकी परत काफी मोटी है I बाकी 2% भाग छोटे पहाड़ों और ऊँची पर्वतश्रेणी के रुप में दिखता है I अंटार्कटिका ऐसा एकमात्र महाद्वीप है, जिसका कोई मूल निवासी नहीं है I अंटार्कटिका खनिजों से समृद्ध है और इसलिए कई विकसित एवं अन्य देशों का उसकी ओर ध्यान गया I अंटार्कटिका एवं दक्षिणी महासागरों का, मछलियों, सील की खालों और व्हेलों के लिए अन्वेषण 18वीं सदी की शुरुआत से ही किया गया I सन् 1959 की अंटार्कटिका संधि के अंतर्गत यह निर्णय लिया गया कि वहाँ का कोई भी भाग किसी देश विशेष का न होकर, सारी पृथ्वी का एक प्राकृतिक प्रदेश होगा, जिसका उपयोग विज्ञान अनुसंधान में होगा I प्रथम चरण में 12 देशों ने इस संधि पर हस्ताक्षर किये थे और अब इसमें 40 देश सम्मिलित हैं I सभी इस बात पर दृढ़ हैं कि इस महाद्वीप का उपयोग विज्ञान के शांतिपूर्ण अनुसंधान के लिए ही किया जाएगा I अंटार्कटिका दुनिया की अद्वितीय प्राकृतिक प्रयोगशाला है और इस खासियत ने वैज्ञानिकों को उसकी और आकर्षित किया है :

  • वह सूर्य से उत्सर्जित आवेशित कणों एवं भूचुम्बकीय क्षेत्र के बीच होनेवाली पारस्परिक क्रिया के अध्ययन के लिए एक मुख्य क्षेत्र है
  • यह वैज्ञानिक अन्वेषणों के लिए एक सदृढ़ क्षेत्र है I उद्योगों के केंद्रों से बहुत दूर होने के कारण यहाँ पर किसी प्रकार का प्रदूषण नही होता I अतः सारी पृथ्वी पर प्रदूषण के कारण हुए, परिवर्तनों को इसकी तुलना में आंका जा सकता है I
  • हिंद महासागर, अंध महासागर एवं प्रशांत महासागर ये तीनों महासागर, इस महाद्वीप के इर्द-गिर्द मिलते हैं I
  • पृथ्वी की उष्मा का नियंत्रण दोनो ध्रुवों द्वारा होता है I विषुवत एवं अन्य क्षेत्रों में उत्पन्न उष्मा, वातावरण एवं समुद्र के माध्यम से इस क्षेत्र में स्थानांतरित होती है और यहां से दीर्घ तरंग प्रकीर्ण के रुप में अंतरिक्ष में निष्पादित होती है I
  • अंटार्कटिका के हिमनदों में पृथ्वी का 90% बर्फ का भण्डार है, इस महाद्वीप में पृथ्वी का 70% मीठा जल मौजूद है I
  • खनिजों की खाने वगैरह अब तक न होने के कारण इस महाद्वीप में कोयले, लोहे, यूरेनियम, तांबे, सीसे, तेल एवं गैस के बड़े भण्डार होने की सम्भावना है I

IIG in the Indian Antarctica Scientific Expedition

 

IIG has been participating in the Indian Antarctic Expeditions right from its inception. A semi permanent magnetic observatory was set up at Dakshin Gangotri (DG, 70o S, 12o E). A Fluxgate Magnetometer was set up to record magnetic variations in the three orthogonal components H, D and Z. A Proton Precession Magnetometer was operated to record the Total Magnetic Field “F” and a 30MHz analogue Riometer to record the cosmic radio noise absorption. With the shifting of DG to Maitri (70o.77S, 11o.75E geographic; 67o.29S, 57o.97E geomagnetic) to Schirmarchar Oasis, central Dronning Maud Land in 1990 – nearly 70km south of DG, the magnetic observatory has been continuously operating there. The Fluxgate Magnetometer was replaced with Digital Fluxgate Magnetometer (DFM) with 0.1 nT sensitivity in 2002. The magnetic field of the Earth is affected by the dynamic condition in the near-Earth environment of the ionosphere and magnetosphere. The Indian Antarctic Station, Maitri is a sub-auroral station during quiet magnetic conditions and is affected by the southern limb of global Sq current system. With increasing magnetic activity, the auroral oval expands and Maitri moves inside the auroral oval and is affected by auroral current system. Thus, the measurements at this station are providing valuable inputs in monitoring solar wind-magnetosphere-ionosphere interaction and energy transfer as well as understanding the secular variation in the main magnetic field. Our observations reveal that Maitri is situated in the region where maximum decline in geomagnetic field is observed. The total field was declining at a rapid rate of ~110 nT/yr till 2006. The rate of decline has now reduced and is reported as ~70nT/yr.

Three station triangulation Fluxgate Magnetometer experiment around Maitri:

 

The experiment was started in 1992 and repeated six times in the subsequent years to understand and determine the presence and velocity of small-scale, mobile current systems over Maitri. The auroral currents while flowing over Maitri and surroundings, leave signatures in the ground based magnetometers. The velocities are determined from the time lags in the pulsations recorded by the ground magnetometers located at the vertices of a triangle, with sides of 100-250 km. The velocities of these mobile auroral current systems lie typically between 0.5 and 3.0 km/sec.

Maitri, an ideal location for predicting Space Weather:

 

Maitri is ideally suited for nowcasting geospace weather, and perhaps the interplanetary weather. The former refers to the degree of disturbance in electric and magnetic fields and particle population in various regimes of the Earth’s magnetosphere. The latter refers to the magnitude and direction of the solar magnetic field components, the velocity, density and dynamic pressure of solar wind particles in interplanetary space. The magnetic field and Riometer absorption variations recorded at Maitri show good agreement with the IMF variations and the interplanetary solar wind parameters measured by WIND satellite. Thus, Maitri can be an ideal location for prediction of space weather.



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