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वेधशालाएं एवं आंकड़ा विश्लेष

चुबंकीय मापन के इतिहास में अलेक्झान्डर वॉन हमबोल्ट, कार्ल डेरिक गॉस एवं विलहेम वेबर का योगदान अग्रगण्य है, चाहे वेधशालाओं की श्रृखंला के निर्माण में हो या चुबंकीय मापन के लिए उपकरणों की रचना में हो या फिर चुबंकत्व सिद्धान्तों के प्रतिपादन मे हो I हमबोल्ट चुबंकीय वेधशालाओं के स्थापन के लिए जिम्मेदार थे I जर्मनी के गणितज्ञ गॉस ने 1830 में “स्फेरिकल हार्मोनिक विश्लेषण’ का उपयोग कर भूचुबंकीय क्षेत्र का मॉडल बनाया और सिद्ध किया कि पृथ्वी का चुबंकीय क्षेत्र मुख्यतः भूगर्भजनित है I चुबंकीय मापन की इकाई की व्याख्या गॉस द्वारा किये जाने पर दुनिया भर में अलग-अलग स्थानकों पर लंबे समय के लिए चुबंकीय मापन करना संभव हुआ I

सन् 1836 में गॉस और उनके सहयोगियों ने जब गोटिंजन चुम्बकत्व संघ बनाया, तब से भारत भी उसका सदस्य बना और चुम्बकीय वेधशालाओं में प्रेक्षणों के जरिए भूचुम्बकत्व विज्ञान के अध्ययन के लिए प्रयासरत हो गया I कुलाबा (मुंबई) में चुम्बकीय वेधशाला सन् 1846 में शुरु की गई I कुलाबा के चुम्बकीय प्रेक्षण का सिलसिला, आधुनिक युग के पदार्पण से हुए स्थानांतरण के बावजूद जारी रखा गया I यह कुलाबा के समीप ही स्थित अलीबाग में वेधशाला के प्रस्थापन के कारण संभव हुआ I अलीबाग वेधशाला के सही भूचुम्बकीय आंकड़े, उसकी स्थापना से लेकर आज तक अविरत रुप से, भूचुम्बकत्व के अध्ययन के लिए जारी किए जा रहे हैं I

संस्थान की विभिन्न अंतरराष्ट्रीय परियोजनाओं में सक्रिय भागीदारी के फलस्वरुप, विषुवतीय एवं निम्न अक्षांशों पर वेधशालाएं स्थापित की गईं I



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