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ऊपरी वायुमंडल

ऊपरी वायुमण्डल मोटे तौर पर तीन क्षेत्रों में विभाजित किये जा सकते हैं :

1. एक क्षेत्र, जिसमें आवेशरहित घटकों के गतिजों का प्राधान्य है (निचला वायुमण्डल एवं मध्यमण्डल),
2. वह क्षेत्र, जिसमें आवेशरहित घटकों के गतिज एवं प्लाज्मा के विद्युत-गतिज, दोनों मौजूद हैं (आयनमण्डल),
3. 3. वह क्षेत्र, जिसमें प्लाज्मा प्रणालियों का प्राधान्य है (चुम्बकमण्डल)

ग्लोबल इलेक्ट्रिक सर्किट (GEC):
एक एकीकृत मॉडल की सहायता से पृथ्वी के भूचुम्बकीय पर्यावरण का अध्ययन, जिसमें निचले वायुमण्डल की विद्युतधाराओं एवं बल क्षेत्र, सुचालक आयनमण्डल एवं चुम्बकमण्डल सम्मिलित हैं, जिनके जरिए पृथ्वी का चुम्बकत्व अपना प्रभाव डालता है I

मध्य एवं ऊपरी वायुमण्डल के गतिज:
राडार प्रेक्षण की सहायता से विभिन्न ऊंचाइयों पर आवेशरहित वायुमण्डल एवं आयनमण्डल के विभिन्न क्षेत्रों के युग्मन का अध्ययन किया जा रहा है I

भूचुम्बकीय स्पंदन :
ये भूचुम्बकीय क्षेत्र के उच्चावचन हैं, जो एक घंटे से कम अवधि के होते हैं I इनका उपयोग अंतरिक्षीय प्लाज्मा क्रियाओं के अध्ययन में होता है, जो चुम्बकमण्डल के विभिन्न क्षेत्रों में होती रहती हैं I उनके जनन का सैद्धांतिक अध्ययन भी किया जाता है I

 

विषुवतीय एलेक्ट्रोजेट (EEJ):
सूर्याभिमुख गोलार्ध में, भूचुम्बकीय विषुवत् के उत्तर एवं दक्षिण में एक छोटे से बेल्ट पर, पश्चिम से पूर्व की ओर बहनेवाली एक उच्च धारा प्रणाली को विषुवतीय एलेक्ट्रोजेट कहते हैं I विषुवतीय क्षेत्र में एक प्रमुख धारा निकाय होते हुए यह निम्न अक्षांशीय क्षेत्रों में आयनमण्डलीय प्लाज्मा के गतिज एवं विद्युतगतिज, दोनों ही पर नियंत्रण रखती है I

आयनमण्डलीय अनियमितताएँ:
सतही रेडियो एवं वायुदीप्ति तकनीकों से प्लाज्मा उच्चावचनों से जनित, आयनमण्डलीय प्लाज्मा की संरचनाओं एवं अनियमितताओं का चित्रण किया जाता है I GPS उपग्रहों द्वारा प्रसारित रेडियो तरंगों के प्रेक्षणों ने आयनमण्डलीय संरचनाओं के अध्ययन के लिए एक नया साधन दिया हैI इस क्षेत्र में सैद्धांतिक अध्ययन भी किए जा रहे हैं I वायुदीप्ति के माध्यम से गुरुत्वाकर्षणीय तरंगों का अध्ययन भी चल रहा है I

सौर पवन चुम्बकमण्डल-आयनमण्डल युग्मन :
सतही एवं उपग्रहों से प्राप्त आंकड़ों के विश्लेषण से प्राप्त सौर पवन जनित चुम्बकमण्डल-आयनमण्डल युग्मन से सम्बंधित प्लाज्मा प्रक्रियाओं के सैद्धांतिक मॉडलों का विकास किया जा रहा है I उपतूफानों के सैद्धांतिक अन्वेषण के लिए, विभिन्न चुंबक-जलगतिकीय (MHD) का सहारा लिया जा रहा है एवं उसके लिए कम्प्यूटर प्रोग्राम का विकास जारी है I

अंतरिक्षीय मौसम का पूर्वानुमान:
इस कार्यक्रम का मुख्य ध्येय, सूर्य की सतह, सौर पवन, चुम्बकमण्डल, आयनमण्डल एवं उष्ममण्डल की स्थिति का पूर्वानुमान लगाना है, क्योंकि इनकी स्थिति का अंतरिक्षीय एवं सतही तकनीकी प्रणालियों की कार्यक्षमता पर सीधा असर पड़ता है I

 


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